अतिथि Post: Kumar Harsh, बोतल भरके सपने

अतिथि Post Kumar Harsh, बोतल भरके सपने

अतिथि Post: Kumar Harsh, बोतल भरके सपने

तराज़ू मैं तोले थे आज सोने के कुछ सिक्के उसने,

आसमान सिर पे था,

पैर ज़मीन पर मेरे,

घर आया एक नन्हा सा सपना था,

क़ैद कर लिया बोतल मैं मैंने उसे,

चमक थी उसकी सोने से कहीं ज़्यादा,

कहता था वो कभी कभी,

हुज़ूर कब है आज़ाद करने का इरादा तुझे।।।।

 बोतल भरके सपने

taraazoo main tole the aaj sone ke kuchh sikke usane,

aasamaan sir pe tha,

pair zameen par mere,

ghar aaya ek nanha sa sapana tha,

qaid kar liya botal main mainne use,

chamak thee usakee sone se kaheen zyaada,

kahata tha vo kabhee kabhee,

huzoor kab hai aazaad karane ka iraada tujhe….


हमारा अतिथि आज एक लेखक है जो मेरा पसंदीदा ब्लॉगर भी है और बहुत कुछ लिखते हैं। उनके अन्य शौकों में फोटोग्राफी, गायन, वायलिन, गिटार बजाना शामिल है। वह एक बात में विश्वास करते हैं- “हमारे सभी में एक जीवन है और एक जीवन में पछतावा के लिए स्थान नहीं है।” सकारात्मकता के लिए आकर्षित ज़्यादातर समय उसके लिए ज़ोर से बात करना मुश्किल होता है| उनका ब्लॉग यहां इसी उद्देश्य को पूरा करता है। वे एक मूक पर्यवेक्षक और एक शांंत श्रोता हैं| …. यदि आप कुछ सार्थक लेखन पढ़ना चाहते हैं तो Kumar Harsh के  ब्लॉग पर जाएं मुझे यकीन है कि आप निराश नहीं होंगे। उसके साथ मेरी बातचीत सबसे सुखद थी मुझे विश्वास है कि आप इसे भी आनंद लेंगे|

Our guest today is a writer who happens to be my favourite blogger and loves to write a lot. His other hobbies include photography, singing, playing the violin, guitar. He believes in one thing- “All of us have one life and one life cannot have space for regrets.” Attracted to positivity. Most of the times it is difficult for him to say things out loud. His blog here serves this purpose. A silent observer and a patient listener…. if you want to read some soulful writing then visit his blog. I’m sure you won’t be disappointed will be left wanting for more. My chat with him was most enjoyable. I am confident you will enjoy it too.


 

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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