अतिथि Post: Naresh Thadani-बैठे बैठे

अतिथि Post: Naresh Thadani-बैठे बैठे

अतिथि Post Naresh Thadani-बैठे बैठे

बैठे बैठे

बैठे बैठे मैं…
इक खयाल बन जाता हूँ।

जिसका कोई जवाब नहीं…
मैं वोह सवाल बन जाता हूँ।

नफरत और प्यार के बीच की
उस डोर का मैं..
अदभुत बवाल बन जाता हूँ।

अनसुलझी गुत्तियों का मैं..
क्रूर जंजाल बन जाता हूँ।

दुखती रत पे हाथ रख के
साँस जो लूँ मैं…
वोह मिसाल बन जाता हूँ।

असफल पहलुओं से धिक्कारा गया मैं..
वोह निकाल बन जाता हूँ।

खंजरों को दिल से लगा कर मैं..
खुद एक मजाल बन जाता हूँ।

तूफानों से अपनी सिसकियों से लड़ा कर मैं…
वोह धँसा बेहाल बन जाता हूँ।

बैठे बैठे मैं…
इक खयाल बन जाता हूँ। ।

जिसका कोई जवाब नहीं…
मैं वोह सवाल बन जाता हूँ।

नफरत और प्यार के बीच की
उस डोर का मैं..
अदभुत बवाल बन जाता हूँ।

अनसुलझी गुत्तियों का मैं..
क्रूर जंजाल बन जाता हूँ।

दुखती रत पे हाथ रख के
साँस जो लूँ मैं…
वोह मिसाल बन जाता हूँ।

असफल पहलुओं से धिक्कारा गया मैं..
वोह निकाल बन जाता हूँ।

खंजरों को दिल से लगा कर मैं..
खुद एक मजाल बन जाता हूँ।

तूफानों से अपनी सिसकियों से लड़ा कर मैं…
वोह धँसा बेहाल बन जाता हूँ।

बैठे बैठे मैं…
इक खयाल बन जाता हूँ।

 

baithe baithe

baithe baithe main…
ik khayaal ban jaata hoon.

jisaka koee javaab nahin…
main voh savaal ban jaata hoon.

napharat aur pyaar ke beech kee
us dor ka main..
adabhut bavaal ban jaata hoon.

anasulajhee guttiyon ka main..
kroor janjaal ban jaata hoon.

dukhatee rat pe haath rakh ke
saans jo loon main…
voh misaal ban jaata hoon.

asaphal pahaluon se dhikkaara gaya main..
voh nikaal ban jaata hoon.

khanjaron ko dil se laga kar main..
khud ek majaal ban jaata hoon.

toophaanon se apanee sisakiyon se lada kar main…
voh dhansa behaal ban jaata hoon.

baithe baithe main…
ik khayaal ban jaata hoon. .

jisaka koee javaab nahin…
main voh savaal ban jaata hoon.

napharat aur pyaar ke beech kee
us dor ka main..
adabhut bavaal ban jaata hoon.

anasulajhee guttiyon ka main..
kroor janjaal ban jaata hoon.

dukhatee rat pe haath rakh ke
saans jo loon main…
voh misaal ban jaata hoon.

asaphal pahaluon se dhikkaara gaya main..
voh nikaal ban jaata hoon.

khanjaron ko dil se laga kar main..
khud ek majaal ban jaata hoon.

toophaanon se apanee sisakiyon se lada kar main…
voh dhansa behaal ban jaata hoon.

baithe baithe main…
ik khayaal ban jaata hoon.

 

About the Author

A YouTuber, A Dubsmasher, an Aspiring Actor and extremely modest of soul.
Where the joy is concerned, he has worked in few ads too, motorbikes, chocolate ad etc.

“I ain’t a writer, and I assure you I will never be ever.
Notwithstanding people bleed-through ink and showcases them in words.”

In his case, he experiences everything live. He carries an old 17th-century physiognomy,  in the era of 19th century.

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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