अतिथि Post: Naresh Thadani, मोहब्बत ख़त्म हुई

अतिथि Post: Naresh Thadani, मोहब्बत ख़त्म हुई

अतिथि Post: Naresh Thadani, मोहब्बत ख़त्म हुई

मोहब्बत ख़त्म हुई

मोहब्बत ख़त्म हुई।
प्यार का नज़राना अभी बाक़ी है
यार का फ़साना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
दिल का तड़पना अभी बाक़ी है
रूह को जलाना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
गिर के संभालना अभी बाकी है
मुक़म्मल खड़ा रहना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
साकी से दे प्याला पे प्याला अभी बाक़ी है
नशे में गमज़दा होना अभी बाकी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
ज़ख्मो को कुरेदना अभी बाक़ी है
बंद टाँकों को उधेड़ना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
सपनों का उझड़ना अभी बाक़ी है
सच्चाइयों में उलझना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
दुखों का बांध टूटना अभी बाक़ी है
आँसूओं की आंधी छूटना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
अल्फ़ाज़ों में दर्द लिखना अभी बाक़ी है
हमदर्द का टुकड़ों में दर्द लेना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई
रूह का फ़रामोश होना अभी बाकी है
जिंदगी का सरफ़रोश होना अभी बाक़ी है।

मोहब्बत ख़त्म हुई।
हाँ।
अब .. ख़त्म हुई।💔

mohabbat khatm huee

mohabbat khatm huee.
pyaar ka nazaraana abhee baaqee hai
yaar ka fasaana abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
dil ka tadapana abhee baaqee hai
rooh ko jalaana abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
gir ke sambhaalana abhee baakee hai
muqammal khada rahana abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
saakee se de pyaala pe pyaala abhee baaqee hai
nashe mein gamazada hona abhee baakee hai.

mohabbat khatm huee
zakhmo ko kuredana abhee baaqee hai
band taankon ko udhedana abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
sapanon ka ujhadana abhee baaqee hai
sachchaiyon mein ulajhana abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
dukhon ka baandh tootana abhee baaqee hai
aansooon kee aandhee chhootana abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
alfaazon mein dard likhana abhee baaqee hai
hamadard ka tukadon mein dard lena abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee
rooh ka faraamosh hona abhee baakee hai
jindagee ka sarafarosh hona abhee baaqee hai.

mohabbat khatm huee.
haan.
ab .. khatm huee.


अस्वीकरण
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asveekaran
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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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