अतिथि Post: Roshni Borana, हर सौतेली माँ बुरी नहीं होती

अतिथि Post: Roshni Borana, हर सौतेली माँ बुरी नहीं होती

पर जिसका दिल काँच की तरह साफ है ,   क्या उसे कभी अच्छी माँ होने का दर्जा और सम्मान मिला?  क्या बीतती होगी उस माँ के दिल पर ?  उसकी ममता पर ।।।  जिसे लोग ताने मारते है   उसकी ममता पर उंगली उठाते है   उनकी कुर्बानी ओर प्यार को भी दिखावा समझते है   क्या लोगो ने कभी उनका नजरिया समझा   उस माँ की दिल की हालत समझी ,  जो अपना बच्चा ने होते हुए भी उसे अपना कलेजे का टुकड़ा मानती है    लोगो के बुरी नजर से बचाती है   अपना निवाला भी बच्चे को देती है   धूप मे अपने आँचल का छाव देती है   अन्धेरे मे रोशनी बनती है   क्या लोग कभी इस प्यार को समझ पायेंगे  ?  क्या सौतेली माँ की नयी छवी बना पायेंगे ? 

कहते है की जन्म देने वाली माँ से बढ़कर होती है उसे पालन पोषण करने वाली माँ

जैसे कृष्ण को जन्म देने वाली जानकी  मैय्या से बढ़कर उनका लालन पालन करने वाली यशोदा मैय्या थी

पर क्या असल जिन्दगी मे कोई यशोदा मैय्या जैसे हो सकता है….??

हाँ हो सकता है…..!!!

क्या हर सौतेली माँ बुरी होती है ? 

क्यूँ लोग हमेशा एक सौतेली माँ को बुरी समझते है ??

शायद कोई सौतेली माँ  के बुराई के दर्द किसी ने सहन  किये होगे, जिससे लोगों का विश्वास उठ गया 

पर जिसका दिल काँच की तरह साफ है ,   क्या उसे कभी अच्छी माँ होने का दर्जा और सम्मान मिला?  क्या बीतती होगी उस माँ के दिल पर ?  उसकी ममता पर ।।।  जिसे लोग ताने मारते है   उसकी ममता पर उंगली उठाते है   उनकी कुर्बानी ओर प्यार को भी दिखावा समझते है   क्या लोगो ने कभी उनका नजरिया समझा   उस माँ की दिल की हालत समझी ,  जो अपना बच्चा ने होते हुए भी उसे अपना कलेजे का टुकड़ा मानती है    लोगो के बुरी नजर से बचाती है   अपना निवाला भी बच्चे को देती है   धूप मे अपने आँचल का छाव देती है   अन्धेरे मे रोशनी बनती है   क्या लोग कभी इस प्यार को समझ पायेंगे  ?  क्या सौतेली माँ की नयी छवी बना पायेंगे ? 

पर जिसका दिल काँच की तरह साफ है , 

क्या उसे कभी अच्छी माँ होने का दर्जा और सम्मान मिला?

क्या बीतती होगी उस माँ के दिल पर ?

उसकी ममता पर ।।।

जिसे लोग ताने मारते है 

उसकी ममता पर उंगली उठाते है 

उनकी कुर्बानी ओर प्यार को भी दिखावा समझते है 

क्या लोगो ने कभी उनका नजरिया समझा 

उस माँ की दिल की हालत समझी ,

जो अपना बच्चा ने होते हुए भी उसे अपना कलेजे का टुकड़ा मानती है 

 लोगो के बुरी नजर से बचाती है 

अपना निवाला भी बच्चे को देती है 

धूप मे अपने आँचल का छाव देती है 

अन्धेरे मे रोशनी बनती है 

क्या लोग कभी इस प्यार को समझ पायेंगे  ?

क्या सौतेली माँ की नयी छवी बना पायेंगे ? 

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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