अतिथि Post: Sarita Pandey, आज की नारी

अतिथि Post: Sarita Pandey, आज की नारी

अतिथि Post Sarita Pandey, आज की नारी

बार-बार वही पर, हर बार नही
सुनो ,ऐ दुनियावालोंं
ये, अत्याचार इस बार नही।
लड जाऊँँ तूफानोंं से, टकरा जाऊँँ चट्टानोंं से
समझ जाओ, इतनी भी अब मैंं लाचार नही
कर लो भरोसा, “आज की नारी “हूँँ
इतनी भी कमजोर नही,लगते लांंछन हर पल
मर्यादाओंं का उल्लंंघन , ऐसे मेरे संंस्कार नही।
संंभल जाओ, ताकत के मद मेंं जीनेवालोंं
कर ना जाऊँँ कही, दुर्गा सा संंहार नही

अतिथि Post Sarita Pandey, आज की नारी

रुक जाओ, अब बस सहन मुझको ,ये बारम्बार नही
खत्म करो ये, अब बंंद करो ये,
घर-घर अलख जगा दो ये
सहन कही भी ,”आज की नारी” का अपमान नही।

#सरितासृृजना


baar-baar vahee par, har baar nahee
suno ,ai duniyaavaalonn
ye, atyaachaar is baar nahee.
lad jaoonn toophaanonn se, takara jaoonn chattaanonn se
samajh jao, itanee bhee ab mainn laachaar nahee
kar lo bharosa, “aaj kee naaree “hoonn
itanee bhee kamajor nahee,lagate laannchhan har pal
maryaadaonn ka ullannghan , aise mere sannskaar nahee.
sanmbhal jao, taakat ke mad menn jeenevaalonn
kar na jaoonn kahee, durga sa sannhaar nahee

ruk jao, ab bas sahan mujhako ,ye baarambaar nahee
khatm karo ye, ab bannd karo ye,
ghar-ghar alakh jaga do ye
sahan kahee bhee ,”aaj kee naaree” ka apamaan nahee.

#saritaasrrjana

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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