आईना कहता है | उम्र

आईना कहता है | उम्र

बढ़ती उम्र के साथ
मन बूढ़ा नही होता
इच्छायें नही मिटती
सीखने की प्यास नही बुझती
इन बूढ़ी आँखों मे
भले चश्मे की दीवार चढ़ गई हो
पर दुनिया से बेख़बर हो जाएँ
ऐसी इनकी इच्छा नही करती
उम्र का पड़ाव सिर्फ़ संख्या को
परिभाषित करता है
मन की कोई उम्र नही होती
उत्साहित मन ज़िन्दगी की
निरस्तेजता को मिटाता है
वरना ज़िन्दगी तो बेरहम है
कब आग़ोश मे समेट ले
इसकी ख़बर ही नही लगती
जिन्दगी को बुढ़ापे की दहलीज़
पार मत करने दो
यूँ ही ज़िन्दादिली से जिये चलो
फिर देखो किसी की जरूरत
ही नही पड़ती…
-प्रतिभा आहूजा नागपाल


जो बड़े बुजुर्ग बदलते समय के साथ
स्वयं में परिवर्तन ले आते
वे उम्र के हर पड़ाव में
जीवन के प्रति क्षण को
हंसी खुशी बिताते,
जाते-जाते इस दुनिया में
जिंदादिली की एक
मिसाल कायम कर जाते ।
-ऋतू जैन


जीवन के सफ़र में सीखा बहुत कुछ
बालों की सफेदी देह की सिलवटें
शरीरी थकन मन आज भी वही
जिजीविषा सुंदर जीवन की चाह
ज्ञान के गागर में सागर समा जाए
सामाजिक न्याय में आवाज़ उठाएं
नज़र कमज़ोर नज़रिया विशाल है
विश्व कल्याण की आज भी है चाहत
अन्तिम श्वास तक उत्साहित है मन
लो इस आंचल में अनंत प्रेम को पाओ
-मधु खरे


उम्र का चाहे कोई भी दौर हो
लेकिन अखबार लुभाए हर उम्र को
देश – विदेश की खबरें ज्ञान को ताजा रखे
अखबार बने आत्मा , खुद को बनाए तरो ताजा ।।
-मंजू लता


दुनिया की उलझनें,
सिमट कर समाचार पत्र बन गईं,
हमारी भी उम्र,
वक्त के साथ ढल गई,
खोजती है नज़र कोई मसाले दार खबर,
दिल अभी भी है रंगरेज नहीं कोई शिकन,
मन आनन्दित और रहता आज़ाद
अपनी ही दुनिया में हम रहते है मगन।
-हरमिंदर कौर

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    उम्र की वह दहलीज जहां
    जिम्मेदारियों से मुक्त, फुर्सत
    के क्षणों में उठा रही लुत्फ
    अखबार पढ़ने का।
    नजरे कमजोर हो गई किन्तु
    देश विदेश की खबरे जानने की
    उत्कंठा मन में समाई ।
    रह न जाये कोई खबर अनदेखी
    इसलिये ऐनक है लगाई।
    -मृदुला सिंह


    आईना कहता है
    जब भी हो जाती हूँ उदास,
    निहारती हूँ तब अपना अक्स ,
    देखती हूँ आइने में अपने को,
    तब बहुत कुछ आइना कहता है।
    मत हो परेशाँ ये दुनिया ऐसी ही है,
    मस्त रहा कर तू जैसी भी है,
    क्यों करती परवाह किसी की,
    तुम से खूबसूरत कोई कृति नहीं है।।
    -डाॅ राजमती पोखरना सुराना


    आइना कहता है।
    देखो,ऐसे न रूठो…
    जो बोलूंगा, सच बोलूंगा,
    जैसा भाव है वैसा दिखाऊंगा।
    जब भी मेरे आगे आओगे,
    चश्मा किसी और का लगा के,
    तस्वीर अपनी धूमिल ही पाओगे!
    मैं हूँ तुम्हारा-दर्पण!
    -अनीता गुप्ता


    आईना कहता है
    खुद को ज़रा पहचान
    अक्स में क्या रखा है
    तेरे भीतर है तेरी पहचान
    क्यों बनता है नादान
    दिखावे में क्या रखा है
    अंतर्मन है असली आईना
    तेरी सोच है तेरी पहचान
    -मुकेश भटनागर


    आईना कहता है
    मैं तुम्हारा सच्चा हमसफ़र
    केवल सच झूठ से परे
    तुम्हारी हंसी में हंसी मेरी
    समय बदला देह बदली
    न बदला ये प्यारा सा मन
    सीख तुम्हें बस इतनी सी
    पुराना कुछ भी रखो नहीं
    कल को आज बुलाओ नहीं
    वर्तमान में जी लो ये जीवन
    पाओ भरपूर आनंद अभी यहां
    -मधु खरे


    आईना कहता है कि-
    तेरे तसव्वुर मे दिन
    निकाल देता हूँ।
    अरे! मुझसे नहीं तो
    ख़ुद से ही मिलने आ जाया करो ।
    मेरे साथ नही तो
    कभी ख़ुद से ही दो बात कर लिया करो।
    वरना आज किसके पास वक़्त है –
    किसी के साथ को अंजाम देने का।
    अपनी तनहाँ ज़िंदगी को मेरे पास आकर
    ख़ुशनुमा कर लिया करो।
    तुम से तुम्हारा परिचय करा
    ख़ुद को ख़ुशनसीब समझूंगा ।
    तुमसे, तुम्हारे अक्स से थोड़ा
    रूबरू मैं भी हो लूँगा ।
    आईना कहता है…..
    -प्रतिभा आहूजा नागपाल

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      आइना कहता है
      क्यों दुखी है तू
      दूसरो की वजह से
      प्यार कर अपने वजूद से
      सुन अपने दिल की
      सबको खुश नहीं रख सकते हम
      बस तू खुश रख अपने को
      देखना जब तू खुश होगी
      तो जमाना भी चलेगा तेरे साथ
      इसलिए मत हो दुखी
      बस खुश रह बस खुश रह
      -मीना कर्माकर


      आईना कहता है
      मैं परछाई तेरी ही बन जाता हुं
      तू जो है वही दिखाता हुं
      मैं ही हुं जो गहरे तेरे राज़ छुपाता हुं
      सच्च से तेरी मुलाकात
      वक्त वक्त पर करवाता हुं !
      -हरमिंदर कौर


      आईना कहता है
      क्यों है तू इतना उदास
      ऐसा क्या है,जो नहीं है तेरे पास
      जरा अपने अंदर झांक कर देख तो सही
      हर किसी मे होती है वो बात
      जो बनाए उसे दूसरों से भी खास।
      -ऋतू जैन


      आईना कहता है झूठ नहीं बोल पाऊन्गा ।
      अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा दिखाऊँगा ।
      दोस्त बना लो मुझे अपना सच्चाई का सामना करना सिखाऊन्गा।
      -दीपाली फाल्के


      अंतस के आईने पर जमी धूल को
      हटा निर्मल मन से संसार को देख।
      मुस्कुराता हुआ चमन नज़र आएगा ।
      कभी किसी दुखिया के आंसू पोछं कर तो देख।
      मन पुलकित हो जाएगा।
      यथार्थ ही मैं सदा दर्शाता हूं।
      सच को मैं अपनाता हूं ।
      यही मेरा किरदार है ।
      आईना गर्व से यह कहता है।
      -सुरक्षा खुराना

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        वक्त कब किसी का एक सा रहता है
        वक्त के साथ चेहरे को किरदार बदलते देखा है
        वक्त के साथ आईने की चमक फीकी पड़ जाए ,तो भी
        झूठ नहीं बोलता,जो देखता है, वहीआईना कहता है
        आईने के अंदर भी एक आईना रहता है।
        -नीति जैन


        आईना कहता है मुझसे
        मै तुम्हारी निखरी सूरत मात्र ही दिखा सकता हूँ
        मगर तुम्हें अपनी सिरत सवांरने के लिए
        अपनी मन रूपी आईना ही निहारना होगा
        -ऋतु मिश्रा


        आईना कहता है…
        मैं आईना हूँ टूटना मेरी फितरत है,
        इसलिए पत्थरों से मुझे कोई गिला नहीं।
        मेरी किस्मत में तो कुछ यु लिखा हैं।
        किसी ने वक़्त गुजारने के लिए
        अपना बनाया तो किसी ने
        अपना बना कर वक़्त गुज़ार लिया।
        आइना और दिल का एक ही फ़साना है।
        आखिर एक ऐसा भी वक़्त होता है
        जो मुस्कुराहट भी आह होती है।
        -कुञ्ज चन्ने


        आईना कहता है सत्य को स्वीकारना सीखो
        क्योंकि ये सत्य ही इन्सान को
        काम, क्रोध, मोह, लोभ से दूर कर
        उसके जीवन को सहज और सरल बनाता है ।
        -मंजू लता


        आईना कहता है…
        मिल-जुलकर साथ रहेंगे,
        तो साथ ईश्वर का मिलेगा।
        बांटे अगर खुशियाँ हजार,
        तो सुख भी दोगुना मिलेगा।।
        -सर्वेश कुमार गुप्ता


        आइना कहता है मुझसे…
        खुद को परख खुद की परवाह तू कर…
        मत दौड़ अंधी दौड़ में…
        खुद को खोने से तू डर…!!
        -नेहा भगत


        इंसा ख़ुद ही आइना है
        धूल से भरी इंसानियत का
        छुपता उससे कुछ भी नही
        अक्स झलकता है नीयत का ।।
        घूम कर आया जो आइना
        दिल के चौकन्ना गलियारों से
        ख़ुद से रूबरू होने का ख़ौफ़
        निशां दिखा गया हक़ीक़त का
        अक्स झलकता है नीयत का ।।
        रक्स करती हैं आइने में
        रोज़ कितनी ही परछाइयां
        हर अंदाज़ा चौंकता है
        भेद खुले जब क़ीमत का
        अक्स झलकता है नीयत का ।।
        ख़ूबसूरत पर्दे से ढांक कर रखा
        चेहरे पर रंग-रोगन कर के देखा
        आइना कहता है जो ” राज़ “
        वह पहचान है उसकी सीरत का
        अक्स झलकता है नीयत का ।
        -रंजना मजूमदार

        आइना कहता है सम्भल भी जाइये,
        दूसरों पे तोहमते लगाने के पहले,
        खुद भी अपना अक्स आइने में
        देख लिजिये ।
        उनमें भी होगी कई कमियां
        ये जान लिजिये ।
        -मृदुला सिंह

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