आकाश बहुत ऊँचा है और दूर बहुत हैं तारे

आकाश बहुत ऊँचा है और दूर बहुत हैं तारे

आकाश बहुत ऊँचा है और दूर बहुत हैं तारे

आकाश बहुत ऊँचा है
और दूर बहुत हैं तारे
पर जब तुम पास होते हो मेरे
तो सपने सच होते हैं सारे

नभ का अँधेरा छट जाता है
अधूरे खवाब पूरे होते हैं
जब चाँद मेरा नज़र आता है
तब सपने जवां होते हैं

तुम आओगे मुझसे मिलने यहाँ
ये था मेरा यकीं
मिलने का वादा तुम तोड़ दोगे
दिल जनता है ऐसा मुमकिन था नहीं

आकाश बहुत ऊँचा है
और दूर बहुत हैं तारे
तेरे प्यार करने का अंदाज़ ही कुछ ऐसा है,
हम तो क्या तुझसे मिलने को तरसती हैं बहारे

ऐ चाँद ज़रा सावधान!
तू भूल जायेगा अपने आपको, जब सुनेगा दास्तां मेरे प्यार की,
दिल की शमा तू जलाकर रखना
तभी देख पायेगा तू एक झलक मेरे यार की

मैं खाख ज़मीन की होकर, तेरी यादों के संग उडती जो चली
तनहा पा कर खुद को आज फिर अपने दिल को तड़पाने लगी
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
ये सोच रेत पर अपनी कहानी मैं लिखती चली

आकाश बहुत ऊँचा है
और दूर बहुत हैं तारे
अब तो बस सिर्फ यादों का एक सिलसिला रह गया है,
और बादलों में छुपे-छुपे से लगते हैं सारे नज़ारे

अगर आज तू किसी और का न होता
तुझे नज़दीक से देखने का हक़ बस हमारा होता
लोग तुझे दूर से ही देखते,
और तेरी नज़रों का कहा मान नज़ारे सारे बोल पड़ते

हिज्र की रातों में है उजाले की उम्मीद हमें,
अब तू ही तो है हमसफ़र मेरी खामोश राहों का
ऐ चाँद, दे बस इतनी रौशनी तू मुझे
की कदम संभल जाए मेरे बदनसीबी के दौर में

बोल तेरे इस परवाने की क्या खता है
जो हर पल तेरी याद में अंगारों की तरह
जल रहे हैं मेरे जज़्बात सारे
आकाश बहुत ऊँचा है
और दूर बहुत हैं तारे
पर जब तुम पास होते हो मेरे
तो सपने सच होते हैं सारे

टिप्पणी

जब अपनों का साथ होता है तो हर मुश्किल आसान हो जाती है और फिर से जी उठने का दिल करता है…
जब अपनों से दूर होते हैं तब कोई भी चीज़ नहीं भाती|
यहाँ तक के आसमान में जड़े चाँद तारे भी हमसे रूठ जाते हैं और उनके साथ भी एक दूरी सी बन जाती है…

 

aakaash bahut ooncha hai aur door bahut hain taare

aakaash bahut ooncha hai
aur door bahut hain taare
par jab tum paas hote ho mere
to sapane sach hote hain saarenabh ka andhera chhat jaata hai
adhoore khavaab poore hote hain
jab chaand mera nazar aata hai
tab sapane javaan hote haintum aaoge mujhase milane yahaan
ye tha mera yakeen
milane ka vaada tum tod doge
dil janata hai aisa mumakin tha nahinaakaash bahut ooncha hai
aur door bahut hain taare
tere pyaar karane ka andaaz hee kuchh aisa hai,
ham to kya tujhase milane ko tarasatee hain bahaareai chaand zara saavadhaan!
too bhool jaayega apane aapako, jab sunega daastaan mere pyaar kee,
dil kee shama too jalaakar rakhana
tabhee dekh paayega too ek jhalak mere yaar kee

main khaakh zameen kee hokar, teree yaadon ke sang udatee jo chalee
tanaha pa kar khud ko aaj phir apane dil ko tadapaane lagee
sitaaron se aage jahaan aur bhee hain
ye soch ret par apanee kahaanee main likhatee chalee

aakaash bahut ooncha hai
aur door bahut hain taare
ab to bas sirph yaadon ka ek silasila rah gaya hai,
aur baadalon mein chhupe-chhupe se lagate hain saare nazaare

agar aaj too kisee aur ka na hota
tujhe nazadeek se dekhane ka haq bas hamaara hota
log tujhe door se hee dekhate,
aur teree nazaron ka kaha maan nazaare saare bol padate

hijr kee raaton mein hai ujaale kee ummeed hamen,
ab too hee to hai hamasafar meree khaamosh raahon ka
ai chaand, de bas itanee raushanee too mujhe
kee kadam sambhal jae mere badanaseebee ke daur mein

bol tere is paravaane kee kya khata hai
jo har pal teree yaad mein angaaron kee tarah
jal rahe hain mere jazbaat saare
aakaash bahut ooncha hai
aur door bahut hain taare
par jab tum paas hote ho mere
to sapane sach hote hain saare

tippanee

jab apanon ka saath hota hai to har mushkil aasan ho jaatee hai aur phir se jee uthane ka dil karata hai…
jab apanon se door hote hain tab koi bhee cheez nahin bhaatee|
yahaan tak ke aasamaan mein jade chaand taare bhee hamase rooth jaate hain aur unake saath bhee ek dooree see ban jaatee hai…

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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