उम्मीदों की खिड़की | कभी अगर मैं रूठ जाऊं | खोजने से मिल जाता है

यदि मैं रूठ जाऊँ तो मुझे मना लेना….जि़द्द करके हल्की सी मुझे हँसा देना…….भुला के सारी बातों को जो दर्द देती हैं…….किया है कितना प्यार मुझसे ये बता देना..,,,अगर मैं रूठ जाऊँ तो ………
Seema Bhargave


कभी अगर मैं रूठ जाऊं तुम अपनी हंसी लूटा देना,
सहारा देकर बाहों का दहलीज पार करा देना
पांवों के वहां पड़ते ही, याद आयेंगी वो पल फिर से
सिमट जाऊंगी बाहों में, तुम फिर वो सपने दिखा देना।
कभी अगर मै रूठ जाऊं गलतियों को मेरी गिना देना,
ना समझ पाऊं तो उन यादों को ताजा कर देना
जब वादा किया था हम दोनों ने , गलत राह न जाने देंगे,
भटक जाऊं न मैं राह से, गिरने से मुझे बचा लेना ।
उम्र के काफी पड़ाव हमने पार कर लिए ,
कुछ तुम सीखे कुछ मैं सीखी ऐसे ही घर बसा लिए
अब इस मोड़ पर भी मैं रूठ जाऊं
तो न भूलना उन दिनों को,
सजाए थे जैसे हमने जीवन को
बस फिर से! तुम उसे वैसे ही सजा लेना।
पर!!!
यदि कभी मैं रूठ जाऊं तुम कभी न सजा देना
लड़ लूंगी सारी दुनिया से , बस साथ तुम मेरा देना।
यदि कभी मैं रूठ जाऊं…….
– Rani Nidhi Pradhan


कभी अगर मैं रूठ जाऊं तो मुझे मना लेना
देखो तुम किसी बात को दिल से ना लगा लेना
माना कई बार कर जाती हूं कुछ नादानियां
मेरी किसी नादानी पर तुम दूरियां ना बना लेना
– Anita Pathak


अगर मैं रूठ जाऊ तो…
तुम भी उदास हो जाओगे।
दूर रहकर मेरी फिक्र करोगे।
पास आकर नहीं जताओगे।
नहीं जानती लेकिन मै …
क्या तुम मुझे मनाओगे।
– Dipali Jadhav


अगर कभी मैं रूठ जाऊ
तो मुझे मना लेना
क्योकि आखिर में
हम दोनों ही साथ होंगे।
– Anita Gupta

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