उम्मीदों की खिड़की | कभी अगर मैं रूठ जाऊं | खोजने से मिल जाता है

कभी अगर मैं रूठ जाऊँ –
तो तुम मुझे मना लेना।
मुझ पर थोड़ा अपना हक़
जता लेना।
नाराज़गी का हक़ तो
मैं भी रखती हूँ।
थोड़ा नाज़ नख़रा-
मेरा तुम सह लेना।
बातों को भूल कर –
तुम अपना हाथ बढ़ा लेना।
हाथ मैं भी तुरन्त बढ़ा दूँगी ।
बस तुम कस के हाथ मेरा
थाम लेना……
– Pratibha Ahuja Nagpal


दिल से उठी रूठ,
आसूँ, आह, हूक
मुश्किलें , कसक
बेचैनी साथ लाये।
– Sarvesh Kumar Gupta


मेरे बच्चों
तुम्हीं से तो गुलजार है मेरी छोटी सी बगिया
तुम्हारे आस पास ही तो है मेरी सारी दुनिया
कभी अगर झूठ मूठ रूठ जाऊं तो मना लेना मुझे
बताया नही कभी भी तुम्हें,
पर आज भी जिंदा है मुझमें बचपन वाली मुनिया।
– Neeti Jain
Dr venugopalan


उम्मीदों की खिड़की | कभी अगर मैं रूठ जाऊं | खोजने से मिल जाता है
उम्मीदों की खिड़की | कभी अगर मैं रूठ जाऊं | खोजने से मिल जाता है

अवसर से न चूकिए करते चलिए सुकृत्य
खोजने से सुगमता से मिल ही जाता है लक्ष्य।
– Neeti Jain


लग्न और परिश्रम को इंसान बना ले अगर हथियार
लक्ष्य क्या खोजने से मिल जाते हैं भगवान।
हिम्मत न हारना धैर्य बनाये रखना,
यह कहावत सत्य हो जायेंगी
लगड़ा भी पहाड़ की चोटी पर चढ़ सकता है ।
– Mridula Singh

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