छनक छनक बाजे पायल

छनक छनक बाजे पायल

रंजीता नाथ घई

छनक छनक बाजे पायल

छनक छनक
छुम छुम छुम छुम छुम
छनक छनक
छुम छुम
बाजे पायल मस्ती में
जब मिलते हैं हम तुम |

*

संग मेरे तू पल पल हर पल
फिर भी, ये दिल से तुझे बुलाती है
याद तेरी मेरे दिल में आकर,
एक हलचल सी मचा जाती है |

*

रुनझुन रुनझुन करते करते,
मीठे सुर सज़ाती है,
मिलन को तरसाती आँखें,
तुझे अपना मीत बताती है |

*

तेरा इंतज़ार करते करते,
दिल में दीप जलाती है,
चुप हैं मेरे लब पर,
पायल शोर मचाती है |

*

हँस जो दूँ गलती से मैं,
ये फिज़ा भी तेरा नाम पूछे जाती है,
ऐसे में ये बैरी पायल,
दिल में नयी हसरतें जगाती है |

*

छुम छुम छुम छुम करती जाती,
गीत नए सुनाती है; ये महफ़िल नयी सजाती है,
पास  हो  तुम  सदा  मेरे,
ये एहसास कराती है, ये एहसास कराती है |

*

छनक छनक
छुम छुम छुम छुम छुम
छनक छनक
छुम छुम
बाजे पायल मस्ती में
जब मिलते हैं हम तुम |

anklets

—–XxXxX—–

Chanaka chanaka bājē pāyala

chanaka chanaka
chuma chuma chuma chuma chuma
chanaka chanaka
chuma chuma
bājē pāyala mastī mēṁ
jaba milatē haiṁ hama tuma |

*

saṅga mērē tū pala pala hara pala
phira bhī, yē dila sē tujhē bulātī hai
yāda tērī mērē dila mēṁ ākara,
ēka halacala sī macā jātī hai |

*

runajhuna runajhuna karatē karatē,
mīṭhē sura sazātī hai,
milana kō tarasātī ām̐khēṁ,
tujhē apanā mīta batātī hai |

*

tērā intazāra karatē karatē,
dila mēṁ dīpa jalātī hai,
cupa haiṁ mērē laba para,
pāyala śōra macātī hai |

*

ham̐sa jō dūm̐ galatī sē maiṁ,
yē phizā bhī tērā nāma pūchē jātī hai,
aisē mēṁ yē bairī pāyala,
dila mēṁ nayī hasaratēṁ jagātī hai |

*

chuma chuma chuma chuma karatī jātī,
gīta na’ē sunātī hai; yē mahafila nayī sajātī hai,
pāsa  hō  tuma  sadā  mērē,
yē ēhasāsa karātī hai, yē ēhasāsa karātī hai |

*

chanaka chanaka
chuma chuma chuma chuma chuma
chanaka chanaka
chuma chuma
bājē pāyala mastī mēṁ
jaba milatē haiṁ hama tuma |

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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