जीवन के परदे पर

जीवन के परदे पर

जीवन के परदे पर

जीवन के परदे पर
हम तुम खेल रहे हैं खेल
शतरंज हो या चोर सिपाही
सही गलत के फैसले का होगा सुन्दर मेल
हर कदम पर लड़ना होगा
हलकी सी चूक परकभ शय होगी तो कभी मौत
कभी वज़ीर बन तो कभी मोहरा बन
बंद होंठों से तिरछी हंसी हँसते
चलेंगे दोनों अपनी चाल|

जीवन के परदे पर
हम तुम खेल रहे हैं खेल
शतरंज हो या चोर सिपाही
सही गलत के फैसले का होगा सुन्दर मेल

बचपन में अक्सर खेला था एक खेल
चोर पुलिसे के खेल ने कितना हमें दौड़ाया भगाया
चीखे चिल्लाये यहाँ तक के ठहाके भी लगाये
पर कौन था असल में चोर
ये आज तक मैं समझ नहीं पाई
आज बड़े हो गए हम
काम काज में व्यस्त हो गए हम
अनमनी सी बेरुखी का शिकार बन गए हम
अपने किस्मत के हाथों की कठपुतली बन गए हम

जीवन के परदे पर
हम तुम खेल रहे हैं खेल
शतरंज हो या चोर सिपाही
सही गलत के फैसले का होगा सुन्दर मेल

एक होगा विजेता हम में
और जीत होगी शानदार
न समझना तुम दुसरे को असहाय
क्यूँकी पायी उसने सीख बड़ी
किस्मत का क्या है…
कल फिर पलटेगी वो, लेगी एक अंगड़ाई नई
ना हार की फिक्र होगी न होगा जीत का ज़िक्र कहीं
बदलते दौर की मजबूरी समझ
कुछ तेरा होगा, कुछ मेरा होगा|

जीवन के परदे पर
हम तुम खेल रहे हैं खेल
शतरंज हो या चोर सिपाही
सही गलत के फैसले का होगा सुन्दर मेल

jeevan ke parade par

jeevan ke parade par
ham tum khel rahe hain khel
shataranj ho ya chor sipaahee
sahee galat ke phaisale ka hoga sundar mel
har kadam par ladana hoga
halakee see chook parakabh shay hogee to kabhee maut
kabhee vazeer ban to kabhee mohara ban
band honthon se tirachhee hansee hansate
chalenge donon apanee chaal

jeevan ke parade par
ham tum khel rahe hain khel
shataranj ho ya chor sipaahee
sahee galat ke phaisale ka hoga sundar mel

bachapan mein aksar khela tha ek khel
chor pulise ke khel ne kitana hamen daudaaya bhagaaya
cheekhe chillaaye yahaan tak ke thahaake bhee lagaaye
par kaun tha asal mein chor
ye aaj tak main samajh nahin paee
aaj bade ho gae ham
kaam kaaj mein vyast ho gae ham
anamanee see berukhee ka shikaar ban gae ham
apane kismat ke haathon kee kathaputalee ban gae ham

jeevan ke parade par
ham tum khel rahe hain khel
shataranj ho ya chor sipaahee
sahee galat ke phaisale ka hoga sundar mel

ek hoga vijeta ham mein
aur jeet hogee shaanadaar
na samajhana tum dusare ko asahaay
kyoonkee paayee usane seekh badee
kismat ka kya hai…
kal phir palategee vo, legee ek angadaee naee
na haar kee phikr hogee na hoga jeet ka zikr kaheen
badalate daur kee majabooree samajh
kuchh tera hoga, kuchh mera hoga

jeevan ke parade par
ham tum khel rahe hain khel
shataranj ho ya chor sipaahee
sahee galat ke phaisale ka hoga sundar mel

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

23 Comments

  1. Yesss….very true..actually we all are chasing some or the other like chor sipahi….but no body knows who is who….and the end blooms out to be beautiful 😊😊💕

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