नदी के दो किनारे की तरह होते हैं कुछ रिश्ते

नदी के दो किनारे की तरह होते हैं कुछ रिश्ते

नदी के दो किनारे की तरह
होते हैं कुछ रिश्ते
थोड़े बेबुन्यादी, तो कुछ कच्चे-पक्के
से होते हैं ये रिश्ते
कुछ तूफानी, कुछ सरल
थोड़े बेगानी, थोड़े मतलबी
तो कुछ वक्त के साथ बदलते
हैं ये रिश्ते
नदी के दो किनारे की तरह
होते हैं कुछ रिश्ते…

कहीं गहरे, कहीं उथले
कहीं ज़िन्दगी का मुख मोड़ते
नगर, गाँव, दिल को जोड़ते
चपल, चंचल, तीव्र, या फिर
बरसाती झरने से होते हैं रिश्ते
कभी चट्टान से अचल
तो कभी कच्चे धागे से कमज़ोर होते हैं रिश्ते
नदी के दो किनारे की तरह
होते हैं कुछ रिश्ते…

निरंतर प्रवाह से कुछ लम्बे
समय तक चलते हैं
तो कुछ बीच में ही दम तोड़ देते हैं
कुछ तट की सीमा पार कर
सैलाब ले आते हैं
तो कुछ विश्वास के अभाव में
सिकुड़ कर मर जाते हैं ये रिश्ते
नदी के दो किनारे की तरह
होते हैं कुछ रिश्ते…

जीवन चलता है मात्र रिश्तों पर
और जीव जीता है मात्र जल पर
जैसे-जैसे जीवन से लोग जुड़ जाते हैं
कुछ निर्जीव तो कुछ सजीव
बेनाम रिश्ते पनप जाते हैं
कुछ यादों के तानो बानो में उलझे होते हैं
कोई कठोर, कोई नरम, कोई कडवे,
कोई मधुर होते हैं कुछ रिश्ते
नदी के दो किनारे की तरह
होते हैं कुछ रिश्ते…

कुछ कांच से टूट कर बिखर जाते हैं
कुछ चुटकी भर सिन्दूर से जुड़ जाते हैं
अपनापन का मुखौटा पहने
भावनाओं के चक्रव्यूह में फँस जाते हैं ये रिश्ते
मानो या न मानो पर अपनी अलग पहचान,
अलग परिभाषा बनाते हैं ये रिश्ते
कभी एकतरफा तो कभी दो तरफ़ा होते हैं ये रिश्ते
कभी खूबसूरत, कभ निशब्द तो कभी बनावटी होते हैं ये रिश्ते
नदी के दो किनारे की तरह
होते हैं कुछ रिश्ते…

 

nadee ke do kinaare kee tarah hote hain kuchh rishte

nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte
thode bebunyaadee, to kuchh kachche-pakke
se hote hain ye rishte
kuchh toophaanee, kuchh saral
thode begaanee, thode matalabee
to kuchh vakt ke saath badalate
hain ye rishte
nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte…kaheen gahare, kaheen uthale
kaheen zindagee ka mukh modate
nagar, gaanv, dil ko jodate
chapal, chanchal, teevr, ya phir
barasaatee jharane se hote hain rishte
kabhee chattaan se achal
to kabhee kachche dhaage se kamazor hote hain rishte
nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte…nirantar pravaah se kuchh lambe
samay tak chalate hain
to kuchh beech mein hee dam tod dete hain
kuchh tat kee seema paar kar
sailaab le aate hain
to kuchh vishvaas ke aabhaav mein
sikud kar mar jaate hain ye rishte
nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte…jeevan chalata hai maatr rishton par
aur jeev jeeta hai maatr jal par
jaise-jaise jeevan se log jud jaate hain
kuchh nirjeev to kuchh sajeev
benaam rishte panap jaate hain
kuchh yaadon ke taano baano mein ulajhe hote hain
koee kathor, koee naram, koee kadave, koi madhur
to koee nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte
nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte…kuchh kaanch se toot kar bikhar jaate hain
kuchh chutakee bhar sindoor se jud jaate hain
apanaapan ka mukhota pahane
bhaavanaon ke chakravyooh mein phas jaate hain ye rishte
maano ya na maano par apanee alag pahachaan,
alag paribhaasha banaate hain ye rishte
kabhee ekatarapha to kabhee do tarafa hote hain ye rishte
kabhee khoobasoorat, kabh nishabd to kabhee banaavatee hote hain ye rishte
nadee ke do kinaare kee tarah
hote hain kuchh rishte…

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

10 Comments

    1. What you can do is copy the URL and paste in one of the posts of your blog. With a reference to my blog and me😊🙏🏼. That’ll be easier and Google can’t blame you for duplicating anybody’s material also…

  1. रिश्ते ऐसे ही होते हैं किसी के लिये सब कुछ किसी के लिए कुछ भी नही। गहरी और भावयुक्त पंक्तियाँ।

  2. Bahut khubsurat kavita hai….Sachmuch nadi ke do kinare ki tarah hote hain riste……Isey maine Rekha Sahay ji ke blog par padha thaa…….Aapke hindi poem ko follow kaise karenge….

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