पृथ्वी के शरीर से उगता हुआ | मस्ती से मन को बहलाना | भीड़ में जब तन्हा, खुदको तुम पाओगे

पृथ्वी के शरीर से उगता हुआ | मस्ती से मन को बहलाना | भीड़ में जब तन्हा, खुदको तुम पाओगे 

पृथ्वी के शरीर से उगता हुआ
एक अद्भुत खूबसूरत दिव्य आकाश
जिस में समाया पूरे ब्रह्मांड का सार
मानव के साथ पंच तत्वों के निराले आकार
पवित्रता प्रेम शांति निष्ठा विश्वास
बनी है उनकी अद्भुत पहचान
चिर आनंद बरसाता सावन
कण-कण होता पूरी तरह निहाल
चले हम और आप भी उनसे अलग नहीं
समा जाएं उसी रूप में और हो जाए बलिहार
-मधु खरे


पृथ्वी के शरीर से उगता हुआ सूरज
पृथ्वी को जीवन्त कर जाता है।
मन का अंधकार दूर कर आशा का दीप प्रज्वलित करता है ।
-दीपाली


ज़र्रा ज़र्रा इस सृषि्ट
का कहता है
कर्ज़दार हूँ मैं उसका
जिसकी कोख से मैं पनपा हूँ
जन्म से मरण तक के सफ़र
को उसी की गोद में पूरा करता हूँ
विशाल हृदय उसका है
सभी को बाँहों
मे समेट लेती है
क्या कहूँ उसकी
विशालता के बारे में
सूरज ,चाँद , तारे
सभी उसी के वजूद से
‘वजूद ‘मे हैं
क्या नाम दूँ इसे वो भू है ,
धरा है ,पृथ्वी है माँ है
पृथ्वी के शरीर से उगता हुआ
हर ज़र्रा उसका कर्ज़दार है…
-प्रतिभा आहूजा नागपाल

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    मस्ती से मन को बहलाना
    पर इतना ध्यान रखना
    कोई हद न पार करना
    आनंद तभी है मिलना
    बुजुर्गो का यही कहना
    -मुकेश भटनागर


    आसू छुपाकर मुस्कुराना आ गया।
    पीछे छोड़कर गमों को आगे बढ़ना आ गया।
    हमे भी मस्ती से मन को बहलाना आ गया।।
    -दीपाली


    मस्ती से मन को बहलाना
    हमको भी आता है
    मन बहलाने के निराले हैं साधन हमारे
    कभी प्रकृति के आंचल में गुनगुनाना
    हमको आता है
    कभी सखियों संग झूले पर बतियाना
    हमको आता है
    कभी मंदिर में पुजारिन बन नृत्य करना
    हमको आता है
    बच्चों की किलकारियों संग खिलखिलाना
    हमको आता है
    मेरा है ये मन‌ इसको बहलाना खूब सुहाता है
    -मधु खरे


    मंज़िलों को पाना है तो उठ जा ज़रा
    हाौंसलों को बुलंद कर
    उंची उड़ान के पंख लगा
    फिर देख ज़मीन को उस आसमान से
    जिस पर तेरा वजूद बनेगा
    याद रखना बस इस बात को अहं से मत भर जाना
    भूल मत जाना उन्हें
    जिन्होंने साथ है तेरा दिया
    फर्श से अर्श तक के इस सफ़र को याद रखना
    पुराने सफ़र को भूल मत जाना यूँ ही सपनों को अंजाम देता चल
    ख़ुद को ज़मीन से जोड़कर
    ऊँचे मुक़ामों पर पहुँच…….
    -प्रतिभा आहूजा नागपाल


    याद हैं वो पल आज भी
    दोस्तों के साथ की मस्ती,
    शैतानी भरी बातों का होना
    और मस्ती से मन को बहलाना ।
    बीत गये दिन वो मस्ती के,
    आ गयी अब है जिम्मेदारी ।।
    -अनीता गुप्ता

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      मज़ा न है दौलत में और न सुख में
      मज़ा है तो बस मस्ती में मस्त रहने में
      मस्ती से मन को बहलाने में
      मन में छिपे बच्चे के साथ जीने में
      -सर्वेश कुमार गुप्ता


      बढ़ती उम्र की पाबन्दी
      मन रूपी बच्चे को मौन कर देती है ।
      उन्माद से भरे उस शरारती को जंजीरों में जकड़ लेती है ।
      मन चाहता है खुले आसमान में स्वच्छन्द उड़ना।
      पर उम्र की कनाअत उसे पिंजरे में क़ैद कर देती है ।
      मस्ती से मन को बहलाना
      बहुत ज़रूरी है
      वरना इसकी नाराज़गी ना समय देखती है ना उम्र का लिहाज़ करती है ।
      असमय ही व्यक्ति को मौन कर देती है ।
      इस बच्चे को न जकड़ो इसे ना टूटने दो
      ये बिफ़र गया तो तुम्हे बिखरने मे देर नही लगेगी…
      -प्रतिभा आहूजा नागपाल


      भीड़ में जब भी तन्हा तुम खुद को पाओगे….
      अपने नजदीक हमको पाओगे….
      रखना मुझ पर इतना भरोसा…
      कि औरों की तरह पराया नहीं बोल पाओगे…!!
      -नेह


      भीड़ में जब भी तन्हा, तुम खुद को पाओगे….
      अपने आस-पास हमको पाओगे..
      कुछ ऐसा रिश्ता है हमारा,
      जहां भी जाओगे…
      मेरा साया साथ पाओगे..!
      -अनीता गुप्ता


      भीड़ में जब भी तन्हा तुम खुद को पाओगे।
      रास्तो की कठिनाईयाँ देखकर घबरओगे।
      एक बार मुड़ कर देखना, मुझे अपने पीछे खड़ा पाओगे ।
      -दीपाली जाधव


      भीड़ में जब भी तन्हा
      तुम खुद को पाओगे
      समझ लेना भिड़ का
      नहीं हो तुम हिस्सा
      कुछ अलग करने की
      मन में ठन गई है
      भीड़ तुम्हारे पीछे
      और तुम भीड़ के आगे
      कुछ ऐसा करिश्मा
      होने वाला है
      -मुकेश भटनागर


      जब हम नहीं होंगे तो,
      भीड़ में तुम तब ,
      खुद को तन्हा पाओगे,
      याद मे हमारी तब तुम,
      हर लम्हा अश्क से,
      तन्हाई में भीग जाओगे।
      तब पछताने के अलावा,
      कुछ भी नहीं रहेगा …..,
      मुझसे मिलने के लिये,
      खुदा की चौखट पर,
      जा जाकर अरदास लगाओगे ।।
      -डाॅ राजमती पोखरना सुराना

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        जब से हम तुमको भुलाने लगे
        हर रिश्ते से दामन छुड़ाने लगे
        तब से भीड़ में भी खुद को तन्हा पाने लगे
        अपनों के दिए दर्द को भूलाकर
        जिंदगी को गले लगाने लगे।
        -ऋतू जैन


        खुशी जीवन का आधार ही नही जीव को जीने का परमसिद्ध अधिकार है। ईश्वर कर्ता है और हम उसके निमित्त।
        -सर्वेश कुमार गुप्ता


        आशाओं से घिरा मन
        जैसे शाखाएं और विशाल वन
        घनी छांव में छुपा शीतल तन
        देख रहा उम्मीदों भरा नील गगन
        आस लिए नव पत्ते उसरें
        पुल्कित हो रहा बच्चे सा मन
        अंधियारा चीर ऊर्जा भरी मिले किरण
        मन करे उड़ जाऊं उन्मुक्त पंछियों संग
        नाप लूं सारा गगन !
        -हरमिंदर कौर


        कश्मकश के जाल मे
        ये उम्मीद की रोशनी है
        मानो पूरी कायनात तेरे साथ है
        बंद दरवाज़ों को जो खोल दे
        नव ऊर्जा के उन्माद से जो भर दे
        वो शक्ति तेरे पास मे है
        अधर मे तू है खड़ा
        धरती नभ के छोर से परे
        फिर भी महफ़ूज़ तू उन हाथों मे है…
        -प्रतिभा आहूजा नागपाल


        मंज़िलों को पाना है तो उठ जा ज़रा
        हाौंसलों को बुलंद कर
        उंची उड़ान के पंख लगा
        फिर देख ज़मीन को उस आसमान से
        जिस पर तेरा वजूद बनेगा
        याद रखना बस इस बात को अहं से मत भर जाना
        भूल मत जाना उन्हें
        जिन्होंने साथ है तेरा दिया
        फर्श से अर्श तक के इस सफ़र को याद रखना
        पुराने सफ़र को भूल मत जाना यूँ ही सपनों को अंजाम देता चल
        ख़ुद को ज़मीन से जोड़कर
        ऊँचे मुक़ामों पर पहुँच…
        -प्रतिभा आहूजा नागपाल


        prthvee ke shareer se ugata hua
        ek adbhut khoobasoorat divy aakaash
        jis mein samaaya poore brahmaand ka saar
        maanav ke saath panch tatvon ke niraale aakaar
        pavitrata prem shaanti nishtha vishvaas
        banee hai unakee adbhut pahachaan
        chir aanand barasaata saavan
        kan-kan hota pooree tarah nihaal
        chale ham aur aap bhee unase alag nahin
        sama jaen usee roop mein aur ho jae balihaar
        -madhu khare


        prthvee ke shareer se ugata hua sooraj
        prthvee ko jeevant kar jaata hai.
        man ka andhakaar door kar aasha ka deep prajvalit karata hai .
        -deepaalee


        zarra zarra is srshita
        ka kahata hai
        karzadaar hoon main usaka
        jisakee kokh se main panapa hoon
        janm se maran tak ke safar
        ko usee kee god mein poora karata hoon
        vishaal hrday usaka hai
        sabhee ko baanhon
        me samet letee hai
        kya kahoon usakee
        vishaalata ke baare mein
        sooraj ,chaand , taare
        sabhee usee ke vajood se
        ‘vajood ‘me hain
        kya naam doon ise vo bhoo hai ,
        dhara hai ,prthvee hai maan hai
        prthvee ke shareer se ugata hua
        har zarra usaka karzadaar hai…
        -pratibha aahooja naagapaal


        mastee se man ko bahalaana
        par itana dhyaan rakhana
        koee had na paar karana
        aanand tabhee hai milana
        bujurgo ka yahee kahana
        -mukesh bhatanaagar


        aasoo chhupaakar muskuraana aa gaya.
        peechhe chhodakar gamon ko aage badhana aa gaya.
        hame bhee mastee se man ko bahalaana aa gaya..
        deepaalee


        mastee se man ko bahalaana
        hamako bhee aata hai
        man bahalaane ke niraale hain saadhan hamaare
        kabhee prakrti ke aanchal mein gunagunaana
        hamako aata hai
        kabhee sakhiyon sang jhoole par batiyaana
        hamako aata hai
        kabhee mandir mein pujaarin ban nrty karana
        hamako aata hai
        bachchon kee kilakaariyon sang khilakhilaana
        hamako aata hai
        mera hai ye man‌ isako bahalaana khoob suhaata hai
        -madhu khare

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          manzilon ko paana hai to uth ja zara
          haaaunsalon ko buland kar
          unchee udaan ke pankh laga
          phir dekh zameen ko us aasamaan se
          jis par tera vajood banega
          yaad rakhana bas is baat ko ahan se mat bhar jaana
          bhool mat jaana unhen
          jinhonne saath hai tera diya
          pharsh se arsh tak ke is safar ko yaad rakhana
          puraane safar ko bhool mat jaana yoon hee sapanon ko anjaam deta chal
          khud ko zameen se jodakar
          oonche muqaamon par pahunch…….
          -pratibha aahooja naagapaal


          yaad hain vo pal aaj bhee
          doston ke saath kee mastee,
          shaitaanee bharee baaton ka hona
          aur mastee se man ko bahalaana .
          beet gaye din vo mastee ke,
          aa gayee ab hai jimmedaaree ..
          -aneeta gupta


          maza na hai daulat mein aur na sukh mein
          maza hai to bas mastee mein mast rahane mein
          mastee se man ko bahalaane mein
          man mein chhipe bachche ke saath jeene mein
          -sarvesh kumaar gupta


          badhatee umr kee paabandee
          man roopee bachche ko maun kar detee hai .
          unmaad se bhare us sharaaratee ko janjeeron mein jakad letee hai .
          man chaahata hai khule aasamaan mein svachchhand udana.
          par umr kee kanaat use pinjare mein qaid kar detee hai .
          mastee se man ko bahalaana
          bahut zarooree hai
          varana isakee naaraazagee na samay dekhatee hai na umr ka lihaaz karatee hai .
          asamay hee vyakti ko maun kar detee hai .
          is bachche ko na jakado ise na tootane do
          ye bifar gaya to tumhe bikharane me der nahee lagegee…
          -pratibha aahooja naagapaal


          bheed mein jab bhee tanha tum khud ko paoge….
          apane najadeek hamako paoge….
          rakhana mujh par itana bharosa…
          ki auron kee tarah paraaya nahin bol paoge…!!
          -neh

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            bheed mein jab bhee tanha, tum khud ko paoge….
            apane aas-paas hamako paoge..
            kuchh aisa rishta hai hamaara,
            jahaan bhee jaoge…
            mera saaya saath paoge..!
            -aneeta gupta

            bheed mein jab bhee tanha tum khud ko paoge.
            raasto kee kathinaeeyaan dekhakar ghabaroge.
            ek baar mud kar dekhana, mujhe apane peechhe khada paoge .
            -deepaalee jaadhav


            bheed mein jab bhee tanha
            tum khud ko paoge
            samajh lena bhid ka
            nahin ho tum hissa
            kuchh alag karane kee
            man mein than gaee hai
            bheed tumhaare peechhe
            aur tum bheed ke aage
            kuchh aisa karishma
            hone vaala hai
            -mukesh bhatanaagar


            jab ham nahin honge to,
            bheed mein tum tab ,
            khud ko tanha paoge,
            yaad me hamaaree tab tum,
            har lamha ashk se,
            tanhaee mein bheeg jaoge.
            tab pachhataane ke alaava,
            kuchh bhee nahin rahega …..,
            mujhase milane ke liye,
            khuda kee chaukhat par,
            ja jaakar aradaas lagaoge ..
            -daaai raajamatee pokharana suraana


            jab se ham tumako bhulaane lage
            har rishte se daaman chhudaane lage
            tab se bheed mein bhee khud ko tanha paane lage
            apanon ke die dard ko bhoolaakar
            jindagee ko gale lagaane lage.
            -rtoo jain


            khushee jeevan ka aadhaar hee nahee jeev ko jeene ka paramasiddh adhikaar hai. eeshvar karta hai aur ham usake nimitt.
            -sarvesh kumaar gupta


            aashaon se ghira man
            jaise shaakhaen aur vishaal van
            ghanee chhaanv mein chhupa sheetal tan
            dekh raha ummeedon bhara neel gagan
            aas lie nav patte usaren
            pulkit ho raha bachche sa man
            andhiyaara cheer oorja bharee mile kiran
            man kare ud jaoon unmukt panchhiyon sang
            naap loon saara gagan !
            -haramindar kaur


            kashmakash ke jaal me
            ye ummeed kee roshanee hai
            maano pooree kaayanaat tere saath hai
            band daravaazon ko jo khol de
            nav oorja ke unmaad se jo bhar de
            vo shakti tere paas me hai
            adhar me too hai khada
            dharatee nabh ke chhor se pare
            phir bhee mahafooz too un haathon me hai…
            -pratibha aahooja naagapaal


            manzilon ko paana hai to uth ja zara
            haaaunsalon ko buland kar
            unchee udaan ke pankh laga
            phir dekh zameen ko us aasamaan se
            jis par tera vajood banega
            yaad rakhana bas is baat ko ahan se mat bhar jaana
            bhool mat jaana unhen
            jinhonne saath hai tera diya
            pharsh se arsh tak ke is safar ko yaad rakhana
            puraane safar ko bhool mat jaana yoon hee sapanon ko anjaam deta chal
            khud ko zameen se jodakar
            oonche muqaamon par pahunch…
            -pratibha aahooja naagapaal

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