विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी

राधा संग तूने प्रीत रचाई,
गोपियों संग रास रचाके तूने पूरे जग में धूम मचाई|
माखन तूने चुरा के खाया,
बांसुरी की धुन पे तूने चिड़िया को जगाया|
गैया तूने खूब चराई,
गोवर्धन से तूने मथुरा बचाई|

सुदर्शन उठाया की धर्म की रक्षा,
असुरों को तूने तनिक न बक्शा|
प्रीत की राह तूने जग को सिखाई,
सुदामा से दोस्ती निभा एक मिसाल दर्शायी|
मईया को तूने बड़ा सताया,
मटकियाँ तोड़ तूने गोपियों रुलाया|

कभी चंचलता से सबको सीख सिखाई,
तो कभी कालिया नाग जैसों को धूल चटाई|
गीता का तूने पाठ पढाया,
अँधेरे से उजाले तक का मार्ग दिखाया|
सखा भी है तू और पालनहार भी है तू,
गोपाल भी तू और गोविंद भी है तू|

कान्हा है, कन्हैया है, घनश्याम भी है तू,
हरि  है, हिरंयगर्भा है, जगन्नाथ है, जनार्धन है तू|
तेरी लीलाओं पे जाऊं मैं बलिहारी,
मुरली मनोहर, विश्वरुपम, योगी भी तू मेरे रास बिहारी|
श्रिष्टी का तू पालनहार,
जन्मदिन पे तेरे हम करे प्रकट हमारा आभार|

–रंजीता नाथ घई सृजन

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vishvarupam yogee

raadha sang toone preet rachaee,
gopiyon sang raas rachaake toone pure jag mein dhoom machaee|
maakhan toone chura ke khaaya,
baansuree kee dhun pe toone chidiya ko jagaaya|
gaiya toone khoob charaee,
govardhan se toone mathura bachaee|

sudarshan uthaaya kee dharm ki raksha,
asuron ko toone tanik na baksha|
preet kee raah toone jag ko sikhaee,
sudaama se dostee nibha ek misaal darshaayee|
maeeya ko toone bada sataaya,
matakiyaan tod toone gopiyon rulaaya|

kabhee chanchalata se sabako seekh seekhaee,
to kabhee kaaliya naag jaison ko dhool chataee|
geeta ka toone paath padhaaya,
andhere se ujaale tak ka maarg dikhaaya|
sakha bhee hai too aur paalanahaar bhee hai too,
gopaal bhee too aur govind bhee hai too|

kaanha hai, kanhaiya hai, ghanashyaam bhee hai too,
hari  hai, hiranyagarbha hai, jagannaath hai, janaardhan hai too|
teree leelaon pe jaoon main balihaaree,
muralee manohar, vishvarupam, yogee bhee too mere raas bihaaree|
shrishtee ka too paalanahaar,
janmadin pe tere ham kare prakat hamaara aabhaar|

ranjeeta nath ghai srijan

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

6 Comments

  1. Very beautifully composed poem on lord Krishna. He is my isthdev. You have beautifully carved the image of Krishna through your words. I will always pray him to shower his blessings in the form of words…….love you……

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