सजदे किये इस दिल ने, इबादत की तेरी….

 

सजदे किये इस दिल ने, इबादत की तेरी

सजदे किये इस दिल ने, इबादत की तेरी….

आज पता चला के कमबख्त हमारे सीने में भी एक दिल है,
वरना लोगों ने तो यकीन ही दिला दिया था के हम संगदिल हैं,
हम तो मुफ्त ही लुट गए तेरे इश्क में ऐ ज़ालिम,
क्या पता था इस दिल को के तेरे तलबगार और भी हैं,
याद में तेरी सब कुछ भुला बैठे हैं,
मोहब्बत में तेरी हम खुद से बेगाने बने बैठे हैं
सजदे किये इस दिल ने, इबादत की तेरी,
डरती हूँ के तू कमजोरी ना बन जाए मेरी…

इश्क में तेरे लुट जाने का मुझे कोई गम नहीं,
पर तेरे पास ना होने से एक कमी सी रहती है,
एक सन्नाटा सा ज़हन को घेरे रहता है,
ना वक़्त कटता है, ना दिल को कुछ भाता है,
हर लम्हा तेरा ही ख्याल ज़हन पे छाया रहता है,
ज़िन्दगी कटेगी तेरे बिन कैसे, इसका मुझे इल्म नहीं,
सजदे किये इस दिल ने, इबादत की तेरी,
डरती हूँ के तू कमजोरी ना बन जाए मेरी….

ना तू मुझसे जुदा, ना मैं तेरे करीब,
फिर भी जाने कौन सी डोर बांधे है हमें,
ना तूने कभी इकरार किया, ना मैंने कभी इनकार,
बस नजर ने नज़र को तलाश किया और बात हो गई,
तेरी आवाज़ के दीवानी मैं, तेरे अंदाज़ पे कायल मैं,
उठ कर तेरे अंजुमन से जब निकलूँ, खुद को पीछे छोड़ आऊँ मैं,
सजदे किये इस दिल ने, इबादत की तेरी,
डरती हूँ के तू कमजोरी ना बन जाए मेरी….


रंजीता नाथ घई

 

sajade kiye is dil ne, ibaadat kee teree….

aaj pata chala ke kamabakht hamaare seene mein bhee ek dil hai,
varana logon ne to yakeen hee dila diya tha ke ham sangadil hain,
ham to mupht hee lut gae tere ishk mein ai zaalim,
kya pata tha is dil ko ke tere talabagaar aur bhee hain,
yaad mein teree sab kuchh bhula baithe hain,
mohabbat mein teree ham khud se begaane bane baithe hain
sajade kiye is dil ne, ibaadat kee teree,
daratee hoon ke too kamajoree na ban jae meree…

ishk mein tere lut jaane ka mujhe koee gam nahin,
par tere paas na hone se ek kamee see rahatee hai,
ek sannaata sa zahan ko ghere rahata hai,
na vaqt katata hai, na dil ko kuchh bhaata hai,
har lamha tera hee khyaal zahan pe chhaaya rahata hai,
zindagee kategee tere bin kaise, isaka mujhe ilm nahin,
sajade kiye is dil ne, ibaadat kee teree,
daratee hoon ke too kamajoree na ban jae meree….

na too mujhase juda, na main tere kareeb,
phir bhee jaane kaun see dor baandhe hai hamen,
na toone kabhee ikaraar kiya, na mainne kabhee inakaar,
bas najar ne nazar ko talaash kiya aur baat ho gaee,
teree aavaaz ke deevaanee main, tere andaaz pe kaayal main,
uth kar tere anjuman se jab nikaloon, khud ko peechhe chhod aaoon main,
sajade kiye is dil ne, ibaadat kee teree,
daratee hoon ke too kamajoree na ban jae meree….

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

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