स्मृति हर गुज़ारे लम्हे की

स्मृति

रंजीता नाथ घई

स्मृति

चले आते हो यादों में,
कभी ठंडी हवा ,
कभी सैलाब बन कर,
भिगो जाते हो,
रूह के रोम-रोम को,
कभी ओस, तो कभी,
बारिश बनकर….

हर गुज़ारा लम्हा,
याद आता है रह-रह कर,
कभी देता है हिम्मत,
तो कभी दर्द बेशुमार,
हंसा जाता है कभी,
तो बह जाता है कभी,
आँसूं बन कर…..

—–XxXxX—–

smrti

chale aate ho yaadon mein,
kabhee thandee hava ,
kabhee sailaabh ban kar,
bhigo jaate ho,
rooh ke rom-rom ko,
kabhee os, to kabhee,
baarish banakar….

har guzaara lamha,
yaad aata hai rah-rah kar,
kabhee deta hai himmat,
to kabhee dard beshumaar,
hansa jaata hai kabhee,
to bah jaata hai kabhee,
aansoon ban kar…..

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

2 Comments

  1. बहुत सुन्दरता से अपनी यादों को इस कविता में व्यक्त किया… अति सुंदर

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