About The Author

ranjeeta nath ghai

मेरी माँ गुजराती और पिता असमिया हैं| एमएच आगरा कैंट, उत्तर प्रदेश में मैं जन्मी हूँ| माता और पिता दोनों आर्मी में डॉक्टर थे| एक पंजाबी से मेरी शादी हुई जो आर्मी में ऑफिसर हैं| “मान की आरज़ू” मेरी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश है, जो मैंने 1985 से आज तक लिखी गई है। सेना अधिकारियों की बेटी और पत्नी होने के नाते मुझे भारत के कई लोगों और सांस्कृतिक समुदाय से जुड़ने का सुनहरा मौका मिला है| शायद ही कभी मैं किसी भी राज्य में 2 साल की अवधि से अधिक रही हूँ| एक ग्राफिक डिजाइनर के रूप में अपना होनहार कैरियर बढ़ाते हुए मैंने एक शिक्षाविद के रूप में एक समानांतर कैरियर बना लिया है, ताकि उसके विस्तार के परिवार के साथ अधिक समय बिता सकूँ।

कवितायेँ लिखना और पढना मेरा शौक ही नहीं मेरा जुनून भी है| मेरी हर कविता की प्रेरणा मुझे ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिली है|

एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में मैंने जीवन को भरपूर जीया है।

“मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया  है।”

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