हम अपने सपने में जीते मरते हैं

apne sapno mein हम अपने सपनों में जीते मरते हैं

हम अपने सपने में जीते मरते हैं

हम अपने सपने में जीते मरते हैं
पर ये तो हमारी किस्मत ही बताएगी
कि कौन किसके पनाह में है…

सपने होते हैं परछाई से
जो रात ढ़लते आते हैं और
दिन चढ़ते लुप्त हो जाते हैं, पर जाते-जाते
मन में एक अजीब सी कसक छोड़ जाते हैं

कभी न करते वो किसी से भेद भाव
हर किसी की आँखों में आते हैं
पर साकार होते हैं वही
जो खुली आँखों से देखे जाते हैं

कुछ अच्छे, कुछ खूबसूरत
कुछ डरावने, तो कुछ काँटों से चुबते हैं
और हम अपने सपने को पूरा करने
की ज़िद्द में बस यूँ ही जीए जाते हैं

हम अपने सपने में जीते मरते हैं
पर ये तो हमारी किस्मत ही बताएगी
कि कौन किसके पनाह में है…

कोई किसी का दर्द क्या समझेगा
जब हर राज़ हम बखूबी से छुपा जाते हैं
कोई अपने ऐशो-आराम के अरमान पूरे करता है
तो कोई बेगानों में खैरात बांटे चले जाते हैं

बेबुन्यादी हो या बेतुके से
सपने तो सपने ही होते हैं
आकाश नापने के खातिर
इन सपने को तुम स्वीकार करो|

जीवन कि आपाधापी में
निरंतर कोशिश जो करता है
सापनों से हकीकत तक जाने वाला
हर कंटक पथ स्वीकार वो करता है|

हम अपने सपने में जीते मरते हैं
पर ये तो हमारी किस्मत ही बताएगी
कि कौन किसके पनाह में है…

टिपण्णी

कई बार हम अपने सपनों में जीते हैं और मरते हैं| सपने स्पष्ट या अस्पष्ट, अजीब और गरीब, खुशनुमा  या उदास, सुंदर या डरावने भी होते हैं| सभी सपने सच नहीं हो सकते हैं, लेकिन खुले आंखों सपने सामान्य रूप से हमेशा से पूरे होते हैं। सपने लोगों के बीच अंतर नहीं करते हैं| वे हमारी अनुमति के बिना हमारी जीवन यात्रा में शामिल होते हैं और हमारे जीवन को बदलते हैं।

Note

Many a times we live and die in our dreams(apne sapne mein). Dreams maybe shadowy or strange, happy or sad, beautiful or scary. All the dreams may or may not come true but those dreams dreamt with open eyes normally always get fulfilled. Dreams do not differentiate between people. They visit us without our permission and change our lives.

 

hum apne sapne mein jeete marte hain

hum apane sapne mein jeete marte hain
par ye to humaree kismat hee bataegee
kee kaun kisake panaah mein hai…

sapne hote hain parachhaee se
jo raat dhalate aate hain aur
din chadhate lupt ho jaate hain, par jaate-jaate
man mein ek ajeeb see kasak chhod jaate hain

kabhee na karate vo kisee se bhed bhaav
har kisee kee aankhon mein aate hain
par saakaar hote hain vahee
jo khulee aankhon se dekhe jaate hain

kuchh achchhe, kuchh khoobasoorat
kuchh daraavane to kuchh kaanton se chubte hain
aur hum apane sapne ko poora karane
kee jidd mein bas yoon hee jeee jaate hain

hum apane sapne mein jeete marte hain
par ye to humaree kismat hee bataegee
kee kaun kisake panaah mein hai…

koee kisee ka dard kya samajhega
jab har raaz hum bakhoobee se chhupa jaate hain
koee apane aisho-aaraam ke aramaan poore karata hai
to koee begaanon mein khairaat baante chale jaate hain

bebunyaadee ho ya betuke se
sapane to sapane hee hote hain
aakaash naapane ke khaatir
in sapno ko tum sveekaar karo|

jeevan kee aapaadhaapee mein
nirantar koshish jo karata hai
saapanon se hakeekat tak jaane vaala
har kantak path sveekaar vo karata hai|

hum apane sapne mein jeete marte hain
par ye to humaree kismat hee bataegee
kee kaun kisake panaah mein hai…

tipannee

kaee baar hum apne sapne mein jeete hain aur marte hain| apne sapno mein dekhi gayee baatein spasht ya aspasht, ajeeb aur gareeb, khushanuma ya udaas, sundar ya daraavane bhee hoti hain| sabhee sapne ya sach nahin ho sakate hain, lekin khule aankhon sapane saamaany roop se hamesha se poore hote hain. sapane logon ke beech antar nahin karate hain| ve hamaaree anumati ke bina hamaaree jeevan yaatra mein shaamil hote hain aur hamaare jeevan ko badalate hain.

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

23 Comments

  1. Nice poem dear. बहुत सही लिखा है तुमने सपनो पर। सच मैं हम अपने सपने मैं जीते हैं मरते हैं।

  2. Very thoughtful and it would have been a black one without last prose, excellent piece. Keep it up ma’am , we are proud of you.

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