छनक छनक बाजे पायल

छनक छनक बाजे पायल

रंजीता नाथ घई छनक छनक बाजे पायल छनक छनक छुम छुम छुम छुम छुम छनक छनक छुम छुम बाजे पायल मस्ती में जब मिलते हैं हम तुम | * संग मेरे तू पल पल हर … Read more

खोज Search

खोज/search

खोज खुद को ना खोजो तुम कागज की इन लकीरों में खोजना ही है तो मेरे दिल में खोजो बसे हो जहां तुम हसीन यादों में। खोजो खुद को मेरी आंखों में तुम रहते हो … Read more

सिसकियाँ

सिसकियाँ

– रंजीता नाथ घई  सिसकियाँ लिखना; अब एक नशा सा बन गया है जुबां जो बयाँ न कर सके कलम भी बस अब उसी मुद्दे पर कहर ढाती है| ~0~ कुछ लिखने से अगर ज़िन्दगी … Read more

मैने रिश्तों को बदलते देखा है

इस मतलबी दुनिया में मैने रिश्तों को बदलते देखा है

इस मतलबी दुनिया मेँ मैने रिश्तों को बदलते देखा है इस मतलबी दुनिया मेँ, मैने रिश्तों को बदलते देखा है दोस्तों को नहीं मैने तो इश्क को भी बिकते देखा है… क्यों खाते हैं  लोग कसमें … Read more

वो चेहरा

वो चेहरा

वो चेहरा गुम-सुम, गुम-सुम थी वो आँखें थकी थकी सी सांसें उसकी  घुटी–घुटी सी थी एक हंसी डरा-डरा सा चेहरा था उसका सहमा-सहमा रहता था वो| बिखरी-बिखरी यादें उसकी उजड़ा-उजड़ा बचपन जीता मांग-मांग कर खाता … Read more

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी राधा संग तूने प्रीत रचाई, गोपियों संग रास रचाके तूने पूरे जग में धूम मचाई| माखन तूने चुरा के खाया, बांसुरी की धुन पे तूने चिड़िया को जगाया| गैया तूने खूब चराई, गोवर्धन … Read more

अंत में अकेली मैं थी खड़ी

अंत में अकेली मैं थी खड़ी

अंत में अकेली मैं थी खड़ी अंत में अकेली मैं थी खड़ी… बेटा-बेटी, पोता-पोती और नातियों के बीच एक मैं भी खड़ी पर अफ़सोस तुम्हें कभी न दिखी बहु और बेटियों नें फर्क रखा तुमने … Read more

नदी के दो किनारे की तरह होते हैं कुछ रिश्ते

नदी के दो किनारे की तरह होते हैं कुछ रिश्ते

नदी के दो किनारे की तरह होते हैं कुछ रिश्ते थोड़े बेबुन्यादी, तो कुछ कच्चे-पक्के से होते हैं ये रिश्ते कुछ तूफानी, कुछ सरल थोड़े बेगानी, थोड़े मतलबी तो कुछ वक्त के साथ बदलते हैं … Read more