Zindagi Ka Sabak | ज़िन्दगी का सबक

zindagi ka sabak ज़िन्दगी का सबक

Zindagi Ka Sabak | ज़िन्दगी का सबक सीखा है ज़िन्दगी का सबक कुछ इस तरह, अपनों ने दिए जख्म और मलहम गैर लगा रहे हैं, ता-उम्र के वादे करके दो पल साथ बैठने की गुजारिश भी नहीं, किसको…

जीवन के परदे पर

जीवन के परदे पर

जीवन के परदे पर जीवन के परदे पर हम तुम खेल रहे हैं खेल शतरंज हो या चोर सिपाही सही गलत के फैसले का होगा सुन्दर मेल हर कदम पर लड़ना होगा हलकी सी चूक परकभ शय होगी…

सिसकियाँ

सिसकियाँ

– रंजीता नाथ घई  सिसकियाँ लिखना; अब एक नशा सा बन गया है जुबां जो बयाँ न कर सके कलम भी बस अब उसी मुद्दे पर कहर ढाती है| ~0~ कुछ लिखने से अगर ज़िन्दगी के मसले सुलझ…

वो चेहरा

वो चेहरा

वो चेहरा गुम-सुम, गुम-सुम थी वो आँखें थकी थकी सी सांसें उसकी  घुटी–घुटी सी थी एक हंसी डरा-डरा सा चेहरा था उसका सहमा-सहमा रहता था वो| बिखरी-बिखरी यादें उसकी उजड़ा-उजड़ा बचपन जीता मांग-मांग कर खाता था वो पाई-पाई…

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी राधा संग तूने प्रीत रचाई, गोपियों संग रास रचाके तूने पूरे जग में धूम मचाई| माखन तूने चुरा के खाया, बांसुरी की धुन पे तूने चिड़िया को जगाया| गैया तूने खूब चराई, गोवर्धन से तूने मथुरा…

मैं क्यों लिखती हूँ

मैं क्यूँ लिखती हूँ

मैं क्यों लिखती हूँ श्याम से श्वेत तक कुछ रंगों की , बिखरी कथाओं को और, कभी कुछ हार्दिक यादों को समेटती हूँ, कभी आनंदित संतुलन के स्तर तक आत्मा को ऊपर उठाने का प्रयास करती हूँ, तो…

समय का पहिया

समय का पहिया

समय का पहिया आपके साथ बिताये पलों को हम हमेशा याद करेंगे चले जाने पे भी जो टूटे नहीं वही तो दिलों का रिश्ता है| एक पंछी हूँ जहाँ उसका ठिकना है कुछ पल गम के और, अनेक…

नए शहर की वो पहली रात [Naye Shahar Ki Woh Pahalee Raat]

नए शहर की वो पहली रात

नए शहर की वो पहली रात नया था माहौल नयी सी बेचैनी और नई सी आबोहवा थी आँखों में कुछ नए-नए से सपने थे कितने ही सवाल मन को गुद्गुताते थे और कुछ मन में उलझने थी याद…