ek dost hai bhoola bhataka sa | एक दोस्त है भूला भटका सा

ek dost hai bhoola bhataka sa एक दोस्त है भूला भटका सा

ek dost hai bhoola bhataka sa | एक दोस्त है भूला भटका सा

एक दोस्त है भूला भटका सा,
एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा….
खो गई कहीं उसकी हंसी,
क्या कोई ढूंढेगा कहीं…?
शायद कहीं भूल आई हो,
या फिर छिन गई कहीं,
दुनिया के इस समंदर में,
तैरना तो नहीं भूल गए कहीं…?
एक दोस्त है भूला भटका सा,
एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा….
खुशी को मत तलाश कर,
तलाशना है तो सुकून को तलाश,
तू है एक अनमोल रत्न,
क्यों ज़ाहिर करती अपनी खुशी,
पलट, देख बैठे है तेरे इंतजार में,
कुछ लम्हें बिखरे बिखरे से,
तेरी हर खुशी पर कुर्बान जाए,
वह तेरे अपने अपने से,
फिर क्यों भटकती तू गली गली…?
उठ, बड़ा हाथ और हासिल कर तू अपनी खुशी
एक दोस्त है भूला भटका सा,
एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा….

(20 अक्टूबर 2015)

 

ek dost hai bhoola bhataka sa

ek dost hai bhoola bhataka sa,
ek dost hai pyaara pyaara sa….
kho gaee kaheen usakee hansee,
kya koee dhoondhega kaheen…?
shaayad kaheen bhool aaee ho,
ya phir chhin gaee kaheen,
duniya ke is samandar mein,
tairana to nahin bhool gae kaheen…?
ek dost hai bhoola bhataka sa,
ek dost hai pyaara pyaara sa….
khushee ko mat talaash kar,
talaashana hai to sukoon ko talaash,
too hai ek anamol ratn,
kyon zaahir karatee apanee khushee,
palat, dekh baithe hai tere intajaar mein,
kuchh lamhen bikhare bikhare se,
teree har khushee par kurbaan jae,
vah tere apane apane se,
phir kyon bhatakatee too galee galee…?
uth, bada haath aur haasil kar too apanee khushee
ek dost hai bhoola bhataka sa,
ek dost hai pyaara pyaara sa….

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About the Author: Ranjeeta2018

कवितायेँ लिखना और पढना रंजीता का शौक ही नहीं पर जुनून भी है| उनकी हर कविता की प्रेरणा उन्हें ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों से मिलती है| "मन की आरज़ू" उनकी कुछ कविताओं को प्रकाशित करने की पहली कोशिश थी , जो वह 1985 से आज तक लिखी गई है। इसके बाद तो मानो एक कतार सी लग गयी है किताबों की... एक बेटी, एक माँ, एक फौजी पत्नी, एक ब्लॉगर, एक ग्राफिक डिजाइनर, एक अध्यापिका और एक लेखिका के रूप में रंजित नाथ घई का जीवन एक पूर्ण चक्र आ गया है। "मेरी किस्मत ने मुझे सब कुछ दिया है और ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया है| आज अपने अतीत में झांकती हूँ तो मुझे कोई अफसोस नहीं होता है क्योंकि मैं अपने जीवन के हर पल को अपने जुनून, अपने नियमों और अपनी शर्तों पर जिया है। "

12 Comments

  1. Very beautiful poem😘😘…..this reminds me of my childhood friends ,which I have not met them till now….but sweet memories are still on…your composed words have again lit the fire inside❤️

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