अतिथि Post: Sarita Pandey, वह पगली

अतिथि Post: Sarita Pandey, वह पगली

अतिथि Post: Sarita Pandey, वह पगली   वह पगली पता नही कहाँँ से आई थी “वह पगली” सबकी आँँखोंं को बडी ही भायी थी “वह पगली”  बडी अजीब थी, मलिन चेहरा ,मरियल सी देह कांंतिविहिन काया की धनी…

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अतिथि Post: Roshni Borana, हर सौतेली माँ बुरी नहीं होती

अतिथि Post: Roshni Borana, हर सौतेली माँ बुरी नहीं होती कहते है की जन्म देने वाली माँ से बढ़कर होती है उसे पालन पोषण करने वाली माँ जैसे कृष्ण को जन्म देने वाली जानकी  मैय्या से बढ़कर उनका…

humein ruthon ko manana na aaya | हमें रुठों को मनाना ना आया

humein ruthon ko manana na aaya हमें रुठों को मनाना ना आया

humein ruthon ko manana na aaya | हमें रुठों को मनाना ना आया हमें रुठों को मनाना ना आया, बिगड़ी बात सवारना न आया, न करीब आ पाए न दूर जाना आया, रुलाया बस….किसी को हसाना ना आया,…

अतिथि Post: Ranjeeta Ashesh, गुलाबी शहर

अतिथि Post Ranjeeta Ashesh गुलाबी शहर2

अतिथि Post: Ranjeeta Ashesh, गुलाबी शहर गुलाबी शहर चौक की दीवारें गुलाबी रंग वाली कहीं सूखी लाल मिर्च का ढेर तो कहीं लक्ष्मी मिष्ठान की शाही थाली। जब जंतर मंतर की देखी कार्य प्रणाली सूरज,ग्रह, समय,नक्षत्र के अद्भुत…

अतिथि Post: सईद सबा उर रहमान- ‘आतिफ’ द्वारा निर्मित गज़ल

अतिथि Post सईद सबा उर रहमान- 'आतिफ' द्वारा निर्मित गजल

Aatif: Zindagi Se Mohabbat Ho Gayi Hai/आतिफ: ज़िन्दगी से मोहब्बत हो गयी है Tujhse Mohabbat Karke Zindagi se Mohabbat ho gayi hai, Shaam to Roz hoti thi Par ab kitni Khoobsurat ho gayi hai. Yun to Ab Tak…

अतिथि Post: धक्कमधुक्की (PUSH AND PULL)

अतिथि Post: धक्कमधुक्की (PUSH AND PULL) कल सुबह से ही दिन थोड़ा आलस वाला था । ये बदलता मौसम ही आलस दे जाता है , कई सारे काम सुबह से इंतजार कर रहे थे और  मन सब कुछ लटका रहा…

अतिथि Post: Ranjeeta Ashesh-मैं खुद से खुद को जोड़ आई

मै खुद से खुद को जोड़ आई

मैं खुद से खुद को जोड़ आई बेपरवाह, बेसुध सा समन्दर मस्ताए, अपने खारेपन पर देखो कितना इतराए, उसकी भीगी रेत पर मै पैरों के निशां छोड़ आई, मैं खुद से खुद को जोड़ आई। उन्मुक्त गगन को,…

अतिथि Post: Rishika Ghai-हिंदी का बहिष्कार क्यों?

हिंदी का बहिष्कार क्यों

हिंदी का बहिष्कार क्यों? हिंदी से सरल कोई भाषा नही फिर भी झिझक होती है बोलने में इतनी न जाने ऐसे क्यों होता है? मातृभाषा होते हुए भी नकारी जाती है और अंग्रजी को बड़ावा मिलता है देशवासी…