स्मृति हर गुज़ारे लम्हे की

स्मृति

–रंजीता नाथ घई स्मृति चले आते हो यादों में, कभी ठंडी हवा , कभी सैलाब बन कर, भिगो जाते हो, रूह के रोम-रोम को, कभी ओस, तो कभी, बारिश बनकर…. हर गुज़ारा लम्हा, याद आता है रह-रह कर,…

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लम्हें

लम्हें

रंजीता नाथ घई लम्हें शायद ही हम कोई ऐसा लम्हा जीए जाते हैं, जो तुम्हारी याद से वाबस्ता ना हो, दिल की धड़कन से साँसों तक की मंजिल में, हर मोड़ पर हम, तुम्हारे ही अफसाने बसाए जाते…

छनक छनक बाजे पायल

छनक छनक बाजे पायल

रंजीता नाथ घई छनक छनक बाजे पायल छनक छनक छुम छुम छुम छुम छुम छनक छनक छुम छुम बाजे पायल मस्ती में जब मिलते हैं हम तुम | * संग मेरे तू पल पल हर पल फिर भी,…

खोज/search

खोज Search

खोज खुद को ना खोजो तुम कागज की इन लकीरों में खोजना ही है तो मेरे दिल में खोजो बसे हो जहां तुम हसीन यादों में। खोजो खुद को मेरी आंखों में तुम रहते हो जहां एक मोती…

सिसकियाँ

सिसकियाँ

– रंजीता नाथ घई  सिसकियाँ लिखना; अब एक नशा सा बन गया है जुबां जो बयाँ न कर सके कलम भी बस अब उसी मुद्दे पर कहर ढाती है| ~0~ कुछ लिखने से अगर ज़िन्दगी के मसले सुलझ…

इस मतलबी दुनिया में मैने रिश्तों को बदलते देखा है

मैने रिश्तों को बदलते देखा है

इस मतलबी दुनिया मेँ मैने रिश्तों को बदलते देखा है इस मतलबी दुनिया मेँ, मैने रिश्तों को बदलते देखा है दोस्तों को नहीं मैने तो इश्क को भी बिकते देखा है… क्यों खाते हैं  लोग कसमें जब उनहोने वादों…

वो चेहरा

वो चेहरा

वो चेहरा गुम-सुम, गुम-सुम थी वो आँखें थकी थकी सी सांसें उसकी  घुटी–घुटी सी थी एक हंसी डरा-डरा सा चेहरा था उसका सहमा-सहमा रहता था वो| बिखरी-बिखरी यादें उसकी उजड़ा-उजड़ा बचपन जीता मांग-मांग कर खाता था वो पाई-पाई…

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी

विश्वरुपम योगी राधा संग तूने प्रीत रचाई, गोपियों संग रास रचाके तूने पूरे जग में धूम मचाई| माखन तूने चुरा के खाया, बांसुरी की धुन पे तूने चिड़िया को जगाया| गैया तूने खूब चराई, गोवर्धन से तूने मथुरा…