आज फिर उस मोड़ पर मुड़ना हुआ

आज फिर उस मोड़ पर मुड़ना हुआ

-रंजीता नाथ घई आज फिर उस मोड़ पर मुड़ना हुआ… आज फिर उस मोड़ पर मुड़ना हुआ  जब रखा था पहला कदम मैंने इस देहलीज़ पर….. मन में डर और एक अजीब  सी बेचैनी थी, नए थे गलियारे और नयी सी दीवारें थी,  थम सी जाती थी हँसी और कशमकश से जूझती थी, फिर दिखी … Read more

नए शहर की वो पहली रात [Naye Shahar Ki Woh Pahalee Raat]

नए शहर की वो पहली रात

नए शहर की वो पहली रात नया था माहौल नयी सी बेचैनी और नई सी आबोहवा थी आँखों में कुछ नए-नए से सपने थे कितने ही सवाल मन को गुद्गुताते थे और कुछ मन में उलझने थी याद है आज भी मुझे नए शहर की वो पहली रात… नए से घर में अनजान सी वो … Read more

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