लम्हें

लम्हें

रंजीता नाथ घई लम्हें शायद ही हम कोई ऐसा लम्हा जीए जाते हैं, जो तुम्हारी याद से वाबस्ता ना हो, दिल की धड़कन से साँसों तक की मंजिल में, हर मोड़ पर हम, तुम्हारे ही अफसाने बसाए जाते हैं… मेरी हर ख्वाइश, हर मुस्कराहट, और, हर सपने पर, तुम्हारा ही इख्तियार हो, हर लम्हा, हर … Read more लम्हें

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