स्मृति

स्मृति हर गुज़ारे लम्हे की

–रंजीता नाथ घई स्मृति चले आते हो यादों में, कभी ठंडी हवा , कभी सैलाब बन कर, भिगो जाते हो, रूह के रोम-रोम को, कभी ओस, तो कभी, बारिश बनकर…. हर गुज़ारा लम्हा, याद आता … Read more

Don`t copy text!