अतिथि Post: Ranjeeta Ashesh-मैं खुद से खुद को जोड़ आई

मै खुद से खुद को जोड़ आई

मैं खुद से खुद को जोड़ आई बेपरवाह, बेसुध सा समन्दर मस्ताए, अपने खारेपन पर देखो कितना इतराए, उसकी भीगी रेत पर मै पैरों के निशां छोड़ आई, मैं खुद से खुद को जोड़ आई। उन्मुक्त गगन को, कैसे घूरता जाए, जुनून से किनारे पर हड़कम्प मचाए, देख रंगत उसकी,मै संकोच का शीशा तोड़ आई … Read more अतिथि Post: Ranjeeta Ashesh-मैं खुद से खुद को जोड़ आई

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