ek dost hai bhoola bhataka sa | एक दोस्त है भूला भटका सा

ek dost hai bhoola bhataka sa एक दोस्त है भूला भटका सा

ek dost hai bhoola bhataka sa | एक दोस्त है भूला भटका सा एक दोस्त है भूला भटका सा, एक दोस्त है प्यारा प्यारा सा…. खो गई कहीं उसकी हंसी, क्या कोई ढूंढेगा कहीं…? शायद कहीं भूल आई हो, या फिर छिन गई कहीं, दुनिया के इस समंदर में, तैरना तो नहीं भूल गए कहीं…? … Read more

धर्म के आड़ में

धर्म

  धर्म की आड़ में मुँह में रामनाम है, और हाथ में जाम है कहीं अल्लाह, कहीं राम, कहीं ईसा मसीह है, कहीं राम है धर्म की आड़ में क़त्ल कर रहा इंसान है कभी मज़हब तो कभी मान है अपनी बनाई रचना पर स्तब्ध है सृष्टि आज मौन है… हैरान है… भोला बचपन बीत … Read more

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